Friday, 5 September 2014

घोसला

जिन्दगी में बिजली का उत्पादन कम हो गया
अब चिड़ियों का जोडी बिजली के तार पर दिखाई नही देते
हमजोली से मिल कर रहने का घर में अंधेरा चागया
बहुत दिन के बाद बस में सफ़र करते हुए समय में यह खयाल मेरे मन में टहल रहे
कुछ सड़कों से गुजरते वक़्त पर
वही पुराने घर, 
शापिंग माल्स के बीच में सुने खांडार की तरह पड़े हुवे
मेरे बचपन के गलियों के दरवाजे से चली हवा
बस के किडिकी से नज़र लड़ाकर
मेरे कान बरदेती
चलो अब से पैदल घूम ने का आदत डाल लेता हूँ
उन दरवाजों को खोल कर
दीवार में खैद हुए अल्मारोंसे
मेरा पेहला पासपोर्ट फोटो तो लेलेता हूँ
वही तो अभीबी
हम सब दोस्तों का
हर एक का
वान्टेड पोस्टर सा रहगया
यही तो एक चीज
बिना टिके नोट की तरह
हर एक बटवों में बटवारा होगया
बिचड़ ते समय में
इस पर लिखी गई सन्देश को
मेरा नज़र का रोशनी  बनाकर
बिजली की तार पर लगादून्गा
कम से कम मेरा दिल
चिड़ियों की बातों का किराया मखान बंनजाएगा

(श्रवन,आरिफ़,वकील)


(27-6-14)

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