जिन्दगी में
बिजली का उत्पादन कम हो गया
अब चिड़ियों का
जोडी बिजली के तार पर दिखाई नही देते
हमजोली से मिल
कर रहने का घर में अंधेरा चागया
बहुत दिन के
बाद बस में सफ़र करते हुए समय में यह खयाल मेरे मन में टहल रहे
कुछ सड़कों से
गुजरते वक़्त पर
वही पुराने घर,
शापिंग माल्स के बीच में सुने खांडार की तरह पड़े हुवे
मेरे बचपन के
गलियों के दरवाजे से चली हवा
बस के किडिकी
से नज़र लड़ाकर
मेरे कान
बरदेती
चलो अब से पैदल
घूम ने का आदत डाल लेता हूँ
उन दरवाजों को
खोल कर
दीवार में खैद
हुए अल्मारोंसे
मेरा पेहला पासपोर्ट
फोटो तो लेलेता हूँ
वही तो अभीबी
हम सब दोस्तों
का
हर एक का
वान्टेड पोस्टर
सा रहगया
यही तो एक चीज
बिना टिके नोट की
तरह
हर एक बटवों में
बटवारा होगया
बिचड़ ते समय में
इस पर लिखी गई
सन्देश को
मेरा नज़र का
रोशनी बनाकर
बिजली की तार पर
लगादून्गा
कम से कम मेरा
दिल
चिड़ियों की
बातों का किराया मखान बंनजाएगा
(श्रवन,आरिफ़,वकील)
(27-6-14)
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