Sunday, 5 October 2014

चाय पे बातचीत



इस शहर में
चाय में दुबे चिन्तक
गरम चाय में
टंडी सांस
टेबल पर माता
जेब में डलता
कोटा सिक्का

बातों बातों में
चाय खतम होगई...
हम ने एक चाय
और एक एम्टी
आर्डर की
उसने कहा
चार चाय!

शहर में हर बात
युहिं बदल जाति
जीना भी
चौराही  पर पुतलों की तरह खड़े होना सिकला देती

काम काज की तलाश में
बीद ज्यादा हो गई
सड़क ने अपना तन चौड़ा कर लिय
खयाल को सांस लेना भी
एक गुटन सी होजाती

एम्टी शहर में
चाहत भी चाय की तरह
खूब बिक्जाती



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