इस शहर में
चाय में दुबे
चिन्तक
गरम चाय में
टंडी सांस
टेबल पर माता
जेब में डलता
कोटा सिक्का
बातों बातों
में
चाय खतम होगई...
हम ने एक चाय
और एक एम्टी
आर्डर की
उसने कहा
चार चाय!
शहर में हर बात
युहिं बदल जाति
जीना भी
चौराही पर पुतलों की तरह खड़े होना सिकला देती
काम काज की
तलाश में
बीद ज्यादा हो
गई
सड़क ने अपना तन
चौड़ा कर लिय
खयाल को सांस लेना
भी
एक गुटन सी होजाती
एम्टी शहर में
चाहत भी चाय की
तरह
खूब बिक्जाती
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