वो जो शायर था
पेड़ पौढ़े फूलोंसे
लम्हे बरथा ता
बस
उसके आँगन में
अब
बेजुभान खामोशी
है
वख्त उसके मेहक
की लिबास पेहन कर
मंडराती है
वो जो शायर था
बिन कहे चला
गया
एक अधूरा सफर ...
घरोंडे के बगीचा छोड़कर
हम ठहरे
वो शायर के गुल्शन
में
उसके यादोंकी
गुलदस्ता की तरह
(बाचि की याद में. G.Uday
Bhaskar-31/7/2021)