Sunday, 27 March 2022

वो जो शायर था

 

वो जो शायर था

पेड़ पौढ़े फूलोंसे

लम्हे बरथा  ता

बस

उसके  आँगन में

अब

बेजुभान खामोशी है

वख्त उसके मेहक की लिबास पेहन कर

मंडराती है 

वो जो शायर था

बिन कहे चला गया 

एक अधूरा सफर ...

घरोंडे  के बगीचा  छोड़कर

हम ठहरे

वो शायर के  गुल्शन  में

उसके यादोंकी गुलदस्ता की तरह

 

(बाचि की याद में. G.Uday Bhaskar-31/7/2021)

No comments:

Post a Comment