तालाब के किनारे
मूम फल्ली खाते हुवे
वक़्त गुजर ताता
धीरे धीरे
तालाब सूखगया
छट पटी
बाते बिकरगए
तन्हाई के खम्बे
जैसे मखान बनगए
मुलाखात का वक़्त
सूख गाया
बातें बाँध ने वाली
तार नहीं है
हम दोनों के बीच
दागे की दास्तान अलग है
(३-१-१३)
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